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ब्लैक फंगस: आरडी गार्डी में नहीं मिल पा रही दवा

पिता की बिगड़ती हालत देख मुख्यमंत्री से गुहार
उज्जैन। कोरोना से जारी लड़ाई के बीच ब्लैक फंगस की दवा का अभाव भी साफ नजर आ रहा है। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में मरीजों को डॉक्टर दवा इंजेक्शन लिख रहे हैं लेकिन मिल नहीं पा रही है। मेडिकल कॉलेज में भी दवा नहीं है जिसके चलते भर्ती मरीज के पुत्र ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है।

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ब्लैक फंगस के बढ़ते मरीजों को देखते हुए जिला प्रशासन ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में मरीजों के उपचार की सुविधा करते हुए अलग वार्ड की व्यवस्था की है। पिछले 1 सप्ताह में ही 20 के लगभग मरीज यहां उपचार के लिए पहुंच चुके हैं। 2 दिन पहले एक युवक की ब्लैक फंगस से मौत भी हो चुकी है। कोरोना संक्रमित होने के बाद इस फंगस का असर उन पर अधिक हो रहा है जो को कोरोना से ठीक हो चुके हैं। अचानक हुई फंगस की दस्तक के बाद अब दवा इंजेक्शन का भी अभाव साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। कोरोना दवा इंजेक्शन की कालाबाजारी की तर्ज पर ही ब्लैक फंगस की दवाओं की कालाबाजारी भी होती दिखाई दे रही है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। जिसके चलते ट्रेंचिंग ग्राउंड क्षेत्र में रहने वाले हेमंत पवार ने इंजेक्शन और दवाओं को लेकर मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। उसने बताया कि पिता मोहनलाल पवार कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस का शिकार हो गए हैं मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए भर्ती किया गया है डॉक्टरों ने इंजेक्शन दवा लिख कर दी है जो पूरे बाजार में नहीं मिल रही है मुख्यमंत्री जी शासन की ओर से इन दवाओं को भी उपलब्ध कराएं। बताया यह भी जा रहा है कि फंगस के मरीजों का ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहा है लेजर सर्जरी से फंगस निकालने का काम डॉक्टर कर रहे हैं।
शुगर और कम इम्यूनिटी वाले शिकार
कोरोना से ठीक हुए जिन मरीजों की इम्यूनिटी काम है और शुगर के साथ अन्य बीमारियां उन्हें घेरे हुए हैं उन मरीजों को ब्लैक फंगस अपना शिकार बना रहा है। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह है कि मरीज को कोरोना होने के बाद ब्लड में ग्लूकोस के लेवल की जांच कराते रहें शुगर के मरीजों में इसके लक्षण अधिक दिखाई दे रहे हैं। कोरोना के बाद इम्यूनिटी कम हो जाती है। जिसे डॉक्टरों की सलाह से बनाए रखने का ध्यान रखना होगा। मरीज हाइपरग्लाइसीमिया से बचें यानी अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखें। कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लड में ग्लूकोज का लेवल पता करते रहें । स्टेरॉयड का बहुत अधिक उपयोग नहीं किया जाए। शुगर के मरीजों में कोई लक्षण दिखे दे तो तत्काल जांच करवाएं।

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