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वाह रे… प्रशासन यह केसा तेरा खेल.. जरूरत निकल गई तो.. छोड़ दी रेल

स्थानीय प्रशासन द्वारा पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, सहयोगियों की खुली उपेक्षा
थांदला से मनीष अहिरवार।
प्रदेश में चल रही कोरोना महामारी के दौर में मीडिया ही एक ऐसा संस्थान है जो अपनी व अपने परिवार की जान की परवाह न करते हुए सड़क पर आकर वास्तविक हालातो से शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता है । प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जी ने मीडिया की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने मीडियाकर्मियों को कोरोना वारियर्स घोषित कर सम्मान दिया है परन्तु झाबुआ का जिला प्रशासन, थांदला का प्रशासन लगातार पत्रकारों की उपेक्षा पर उपेक्षा करता जा रहा है । यह एक बार बुधवार को स्तानीय प्रशासन ने फिर साबित कर दिखाया जब कलेक्टर सोमेश मिश्रा व पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने थांदला का भ्रमण किया परन्तु स्तानीय प्रशासन द्वारा किसी मीडिया को व जनप्रतिनिधियों या समाजसेवियों को सूचना नही दी गई जबकि स्तानीय प्रशासन ने पत्रकारगण व जनप्रतिनिधिगण के नाम से वाट्सएप ग्रुप भी बना रखे है । आखिर स्तानीय प्रशासन ऐसा क्यों कर रहा है ?
कलेक्टर एसपी के भ्रमण से पत्रकारों को क्यो दूर रखा
बुधवार को दोपहर 12. 30 बजे के करीब कलेक्टर सोमेश मिश्रा व पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता थांदला सिविल हॉस्पिटल पहुचते है व निरीक्षण करते है । कोविड व लॉक डाउन के हालातों की जानकारी लेते है व सर्वसुविधायुक्त नवीन एम्बुलेंस का उद्घाटन कर चले जाते है । किसी पत्रकार को स्तानीय प्रशासन की ओर से कोई जानकारी नही रहती । यह तो संयोग से अस्पताल चौराहे पर 1-2 पत्रकार मौजूद होने से पहुच जाते है व उनकी बाइट लेने को कहते तब कलेक्टर साहब कहते कि सभी पत्रकारों को आ जाने दो में उनसे मुखातिब होना चाहता हु । अब कलेक्टर मिश्राजी को क्या पता कि स्तानीय प्रशासन द्वारा पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों, समजसेवियो, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को सूचना ही नही दी गई है ?

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जरूरत निकली छोड़ी रेल
कोविड की महामारी में पत्रकारों ने अपनी व परिवार की जान की परवाह न करते हुए स्तानीय प्रशासन को पूरे लॉक डाउन में हर तरह से सहयोग प्रदान किया, समाचारो के माध्यम से लगातार जहां आमजन को जागरूक किया वही प्रशासन को भी हर समस्याओं व सुझावों से अवगत करवाया जाता रहा । ठीक इसी तरह से नगर के जागरूक समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, जागरूक नागरिकों व व्यापारियों ने क्षेत्र को कोरोना से मुक्त करने की दिशा में रेल के डिब्बो की तरह एकजुट होकर एक रेल बनाकर तन, मन, धन व सुझावों से सहयोग दिया परन्तु इस भ्रमण में स्तानीय प्रशासन ने सभी को सूचना से वंचित रखा । 
किसी को सूचना नही क्यो ?
नगर के जागरूक समाजसेवियों ने आक्सीजन प्लांट लगाने के लिए कलेक्टर महोदय से चर्चा की तो उन्होंने 11 लाख की राशि जनसहयोग से जुटाने का कहा परन्तु नगर के समाजसेवियों ने 15 लाख की राशि देते हुए एम्बुलेंस की भी मांग की । एम्बुलेंस थांदला पहुच गई व बुधवार को कलेक्टर व एसपी दोनो जिलाधिकारी थांदला पहुचे व एम्बुलेंस का उद्घाटन भी कर गए परन्तु सहयोग प्रदान करने वाले किसी समाजसेवी, पत्रकार, जनप्रतिनिधि को खबर नही लगी । क्या दोनो जिलाधिकारी अचानक थांदला पहुचे थे ? क्या एम्बुलेंस का उद्घाटन का कार्यक्रम उनके आने के 2 मिनिट में ही बन गया था ? क्या स्तानीय प्रशासन को उनके आगमन का मालूम नही था ? दोनो जिला अधिकारियों ने जब नगर में प्रवेश किया तो उनके वाहन के आगे एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार के वाहन चल रहे थे। याने स्प्ष्ट है कि स्तानीय प्रशासन नही चाहता था कि मीडिया, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी वहां मौजूद रहे । ऐसा क्यों किया गया यह तो थांदला का प्रशासन जाने या कलेक्टर महोदय जाने परन्तु अब लॉक डाउन खुल जाने के बाद ऐसा लगता है कि कोविड महामारी के कमजोर होने पर इस सहयोगी रेल के डिब्बो तथा रेल की स्तानिय प्रशासन को जरूरत नही है ।
स्तानीय प्रशासन के प्रति रोष
कलेक्टर एसपी के इस भ्रमण के दौरान जिस तरह स्तानीय प्रशासन द्वारा पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, समाजसेवियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपेक्षा से सभी वर्ग में प्रशासन के इस व्यवहार के प्रति आक्रोश उनकी प्रतिक्रियाओ से साफ दिखाई दे रहा है ।

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