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राजस्थान कांग्रेस में कलह
जयपुर।
पंजाब के बाद अब राजस्थान कांग्रेस में भी अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। दरअसल, खबर है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बुधवार रात हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान सरकार के दो मंत्री आपस में भिड़ गए। यह भिड़ंत शांति धारीवाल और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा में हुई। दोनों नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ा कि वहां मौजूद अन्य मंत्रियों को बीच-बचाव कर मामला ठंडा करवाना पड़ा।
यह बैठक सीएम आवास पर बुलाई गई थी। इस दौरान गोविंद सिंह डोटासरा ने सभी जिला कलेक्टरों को ज्ञापन देने को कहा, जिसका शांति धारीवाल ने विरोध किया। शांति धारीवाल का कहना था कि ज्ञापन राष्ट्रपति को भेजा जाना चाहिए, कलेक्टर को देने से क्या होगा। इस पर डोटासरा ने कहा कि राष्ट्रपति को देकर भी क्या कर लोगे। दोनों के बीच हुई इस बहस को सीएम गहलोत भी देखते रह गए। बैठक के दौरान खुद मुख्यमंत्री गहलोत ने दोनों नेताओं को शांत रहने को कहा। हालांकि, यह विवाद थमा नहीं बल्कि बैठक खत्म होने के बाद बाहर आकर भी दोनों मंत्री खुलेआम आपस में भिड़ गए। खबरों के मुताबिक, साथी मंत्रियों ने बीच-बचाव किया नहीं तो उनमें हाथापाई तक की नौबत आ गई थी। बैठक खत्म होने के बाद धारीवाल ने डोटासरा से कहा कि वह उनके आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस पर डोटासरा ने कहा कि वह जब तक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, उनके आदेश मानने पड़ेंगे। डोटासरा ने यह भी कहा कि वह इस मामले की पूरी रिपोर्ट सोनिया गांधी को देंगे।
राजस्थान में 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं रद्द
जयपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण से फैली वैश्विक महामारी का असर बोर्ड की परीक्षाओं पर भी पड़ा है। सीबीएसई के बाद अब राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। बुधवार रात को गहलोत मंत्रिपरिषद् की बैठक में लाखों छात्रों के हित को देखते हुए बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया गया है। कैबिनेट बैठक के बाद शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि अब मार्किंग सिस्टम तय कर छात्रों को प्रमोट किया जाएगा। डोटसरा ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बोर्ड के अधिकारी और शिक्षा विभाग के अधिकारी मिलकर जल्द ही मार्किंग सिस्टम तय करेंगे। मार्किंग सिस्टम से सहमत नहीं होने वाले छात्रों के लिए कोरोना खत्म होने पर परीक्षा देने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। सीबीएसई में भी इसी तरह का विकल्प खुला रखा गया है। राजस्थान में भी उसे ही अपनाया जा सकता है। राजस्थान बोर्ड की परीक्षा में करीब 21 लाख छात्र को शामिल होना था।

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